चाप्टर 10

भारत का संविधान: एक परिचय

अध्याय १०

भारत का संविधान: एक परिचय

संविधान केवल कानूनों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्र की आत्मा और उसकी पहचान का प्रतिबिंब है।

१. संविधान का अर्थ एवं बुनियादी आवश्यकता

परिभाषा और अर्थ:

  • यह किसी देश का सर्वोच्च कानून (Supreme Law) है।
  • यह उन बुनियादी सिद्धांतों का समूह है जिनके आधार पर देश का शासन चलाया जाता है।
  • जैसे एक खेल (फुटबॉल या क्रिकेट) नियमों के बिना नहीं चल सकता, वैसे ही एक देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए नियमों की एक 'रूलबुक' की आवश्यकता होती है।

हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है? Understanding

  • शक्ति पर अंकुश: यह सरकार की शक्तियों को सीमित करता है ताकि शासक अपनी मर्जी से नागरिकों का दमन न कर सकें।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा: यह सुनिश्चित करता है कि देश में लोकतंत्र बना रहे और सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीके से हो।
  • अल्पसंख्यकों का संरक्षण: संविधान बहुसंख्यकों के 'दबदबे' को रोकता है और समाज के कमजोर या अल्पसंख्यक समूहों के अधिकारों की रक्षा करता है।
  • आदर्शों का निर्धारण: यह उन उद्देश्यों और सपनों को परिभाषित करता है जिन्हें हम एक समाज के रूप में हासिल करना चाहते हैं।
  • नागरिक सुरक्षा: यह नागरिकों को 'मौलिक अधिकार' प्रदान करता है जिन्हें राज्य भी नहीं छीन सकता।

२. संविधान निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा

भारतीय संविधान रातों-रात नहीं बना, बल्कि यह वर्षों के विचार-मंथन और संघर्ष का परिणाम है।

संविधान सभा (Constituent Assembly):

  • इसका गठन १९४६ में कैबिनेट मिशन योजना के तहत हुआ था।
  • शुरुआत में इसमें ३८९ सदस्य थे, लेकिन विभाजन के बाद यह संख्या २९९ रह गई।
  • इस सभा में भारत के हर वर्ग, धर्म और विचारधारा के लोगों का प्रतिनिधित्व था।

महत्वपूर्ण व्यक्तित्व:

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद: संविधान सभा के निर्वाचित अध्यक्ष।
  • डॉ. बी. आर. अंबेडकर: 'प्रारूप समिति' के अध्यक्ष। इन्हें 'भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है।
  • अन्य दिग्गज: जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सरोजिनी नायडू, मौलाना अबुल कलाम आजाद और राजकुमारी अमृत कौर।

समयावधि और तिथियाँ:

  • संविधान को पूरा करने में २ वर्ष, ११ महीने और १८ दिन का समय लगा।
  • २६ नवंबर १९४९: संविधान अपनाया गया (संविधान दिवस)।
  • २६ जनवरी १९५०: संविधान लागू हुआ (पूर्ण स्वराज संकल्प की याद में)।

३. प्रेरणा के स्रोत और वैश्विक प्रभाव

भारतीय संविधान दुनिया भर की अच्छाइयों का भारतीय परिस्थितियों में ढला हुआ रूप है।

  • स्वतंत्रता संग्राम: समानता, भाईचारे और लोकतंत्र के सपने को नींव बनाया।
  • सभ्यतागत मूल्य: 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सर्वे भवंतु सुखिनः' के आदर्श।
  • ब्रिटिश संविधान: संसदीय शासन, कानून का शासन।
  • अमेरिकी संविधान: मौलिक अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका।
  • आयरलैंड: नीति निर्देशक सिद्धांत (DPSP)।
  • फ्रांस: स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।
  • कनाडा: मजबूत केंद्र वाली संघीय व्यवस्था।

४. संविधान की प्रस्तावना: एक दर्शन

प्रस्तवाना संविधान का 'सार' है जो हमारे मूल्यों को दर्शाती है:

  • हम भारत के लोग: शक्ति का अंतिम स्रोत जनता है।
  • संप्रभु (Sovereign): भारत निर्णय लेने में पूर्ण स्वतंत्र है।
  • समाजवादी (Socialist): संपत्ति का न्यायसंगत वितरण।
  • धर्मनिरपेक्ष (Secular): राज्य का कोई धर्म नहीं, सभी धर्मों को आजादी।
  • गणराज्य (Republic): राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होगा, वंशानुगत नहीं।
  • चार स्तंभ: न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता।

५. भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ

  • लिखित और विशाल: दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान।
  • संघवाद (Federalism): केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर शक्तियों का बँवारा।
  • संसदीय प्रणाली: कार्यपालिका का विधायिका के प्रति जवाबदेह होना।
  • शक्तियों का पृथक्करण: विधायिका (कानून बनाना), कार्यपालिका (लागू करना), न्यायपालिका (रक्षा करना)।
  • वयस्क मताधिकार: १८ वर्ष से ऊपर सभी को वोट का समान अधिकार।
  • एकल नागरिकता: केवल भारत की नागरिकता।

६. मौलिक अधिकार और कर्तव्य

मौलिक अधिकार (भाग ३):

  • समानता, स्वतंत्रता, और शोषणा के विरुद्ध अधिकार।
  • धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार।
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार: अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट जाने का हक।

कर्तव्य एवं नीति निर्देशक:

  • मौलिक कर्तव्य: तिरंगे का सम्मान, पर्यावरण रक्षा (१९७६ में जोड़े गए)।
  • DPSP: सरकार के लिए कल्याणकारी राज्य बनाने की चेकलिस्ट।

७. धर्मनिरपेक्षता का भारतीय मॉडल

  • समान सम्मान: सभी धर्मों का आदर, किसी एक को बढ़ावा नहीं।
  • हस्तक्षेप: यदि धार्मिक प्रथा मानवाधिकारों का उल्लंघन करे (जैसे सती प्रथा), तो राज्य सुधार कर सकता है।

८. एक जीवित दस्तावेज़

  • अनुच्छेद ३६८: समय के साथ बदलाव (संशोधन) की शक्ति।
  • संतुलन: न बहुत कठोर, न बहुत लचीला।

९. निष्कर्ष और छात्रों के लिए संदेश

  • संवैधानिक नैतिकता: संविधान चलाने वाले लोगों की नैतिकता ही इसकी सफलता की कुंजी है।
  • नागरिक भूमिका: मूल्यों को जीवन में उतारना हमारा कर्तव्य है।
  • लोकतंत्र: यह दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करने का नाम है।

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण शब्द (Glossary)

  • Drafting: मसौदा तैयार करना।
  • Preamble: प्रस्तावना या भूमिका।
  • Sovereignty: संप्रभुता (स्वतंत्र निर्णय शक्ति)।
  • Federalism: संघवाद (शक्तियों का बँवारा)।
  • Equality & Justice: समानता और न्याय।

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