अध्याय 11: वस्तु विनिमय से धन तक (Mind Map)
1. वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System)
- परिभाषा: वस्तुओं या सेवाओं के बदले सीधे अन्य वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करना।
- कार्य प्रणाली: उदाहरण के लिए, एक छात्र के पास अतिरिक्त पेंसिल है और दूसरे के पास अतिरिक्त रबड़, वे आपस में इनका विनिमय कर सकते हैं।
- प्रारंभिक रूप: यह विनिमय का सबसे प्राचीन माध्यम था। इसमें कौड़ी, नमक, चाय, तंबाकू, पशु (गाय, बकरी), और बीज जैसी वस्तुओं का उपयोग होता था।
- विशिष्ट उदाहरण:
- राय पत्थर (Rai Stones): प्रशांत महासागर के याप द्वीप पर विशाल पत्थर के पहियों का मुद्रा के रूप में उपयोग।
- एज़्टेक कॉपर तजादेरी: मध्य मेक्सिको में उपयोग होने वाली तांबे की मुद्रा।
2. वस्तु विनिमय प्रणाली की सीमाएँ (Limitations)
- आवश्यकताओं का दोहरा संयोग: विनिमय के लिए ऐसे व्यक्ति को खोजना जो वही वस्तु चाहता हो जो आपके पास है और बदले में वह वस्तु दे सके।
- मूल्य के सामान्य मानक का अभाव: दो वस्तुओं के मूल्य की तुलना करना कठिन था (जैसे: एक बैल = कितने जूते?)।
- विभाज्यता की समस्या: कुछ वस्तुओं को विभाजित नहीं किया जा सकता (जैसे: बैल का आधा हिस्सा नहीं दिया जा सकता)।
- टिकाऊपन की समस्या: अनाज जैसी वस्तुएं लंबे समय तक जमा नहीं की जा सकतीं क्योंकि वे सड़ सकती हैं।
- पोर्टेबिलिटी की समस्या: भारी वस्तुओं (मवेशी या पत्थर) को ले जाना अत्यंत कठिन था।
3. धन (Money) के मूल कार्य
- विनिमय का माध्यम: सामान और सेवाएँ खरीदने के लिए व्यापक रूप से स्वीकार्य तरीका।
- मूल्य का भंडार: धन को भविष्य के लिए लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
- मूल्य का मानक: यह वस्तुओं की कीमतों को मापने और तुलना करने में मदद करता है।
- आस्थगित भुगतान का मानक: भविष्य में भुगतान करने या उधार चुकाने की सुविधा।
4. मुद्रा की विकास यात्रा (Evolution of Money)
- सिक्के (Metallic Money):
- शासकों द्वारा जारी और नियंत्रित।
- कार्षापण: प्राचीन भारतीय सिक्के जिन पर विशेष चिह्न होते थे।
- सामग्री: सोना, चांदी और तांबे जैसी कीमती धातुएं।
- सांस्कृतिक प्रतीक: जानवरों, राजाओं और देवताओं के चित्र (जैसे चालुक्यों के वराह अवतार सिक्के)।
- कागजी मुद्रा (Paper Money):
- शुरुआत चीन में हुई; भारत में 18वीं सदी के अंत में आई।
- सिक्कों को ढोने की समस्या के कारण अस्तित्व में आई।
- वर्तमान स्थिति: भारत में RBI मुद्रा जारी करने वाला एकमात्र प्राधिकरण है।
5. आधुनिक और डिजिटल धन (Modern & Digital Money)
- अमूर्त रूप: पैसा जिसे हम छू नहीं सकते, जो इलेक्ट्रॉनिक रूप में होता है।
- डिजिटल भुगतान विधियां:
- QR कोड: स्मार्टफोन से स्कैन करके भुगतान।
- अन्य माध्यम: डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस)।
- लाभ: सीधा बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर और नकदी ढोने की ज़रूरत नहीं।
6. आज भी जीवित वस्तु विनिमय के उदाहरण
- जुनबील मेला (असम): यहाँ आज भी आदिवासी समुदाय अपनी उपज का आदान-प्रदान करते हैं।
- किताबों का आदान-प्रदान: दोस्तों के बीच बिना पैसे के पुस्तकों का विनिमय।
- पुराने कपड़ों के बदले बर्तन: घरों में प्रचलित पुरानी विनिमय प्रथा।
अभ्यास के लिए मुख्य बिंदु:
- मुद्रा का प्रतीक: भारतीय रुपये का प्रतीक (₹) 2010 में अपनाया गया, जिसे उदय कुमार ने डिजाइन किया था।
- सुरक्षा: RBI नोटों की नकल रोकने के लिए विशेष सुरक्षा सुविधाएँ प्रदान करता है।
- महत्व: "धन वर्तमान और भविष्य के बीच की एक कड़ी है।"
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